Sunday, April 27, 2014

श्रमिक दिवस - 2014

अखिल भारतीय केंद्रीय कर्मचारी
समन्वय समिति , शाहजहाँपुर

 श्रमिक सभा
दिनांक - 1 मई 2014 समय सायं 5 .30 बजे

स्थान - आल इंडिया पोस्टल एम्प्लाइज यूनियन कार्यालय ,

 प्रधान डाकघर ,शाहजहाँपुर

      
आप सादर आमंत्रित हैं
निवेदक
कल्याणराम                 अरुण प्रताप सिंह
             अध्यक्ष                         महामंत्री
        

Thursday, April 17, 2014

अशोक रावत की ग़ज़लें


(2 )
 लियाक़त है न मेरे पास जीने का क़रीना है,
मगर एक हौसला है,चाहे जो हो मुझको जीना है.

समंदर ही समंदर है, जहाँ तक देख पाता हूँ,
मुझे किस बात का डर हो, कहाँ मेरा सफ़ीना है.

मैं अपने घर को केवल घर नहीं मंदिर समझता हूँ,
यही काशी यही मथुरा यही मेरा मदीना है.

किसी अंजाम तक पहुँचे न पहुँचे ग़म नहीं मुझको,
मेरी नज़रों में हर पत्थर,चमकता एक नगीना है.

तसल्ली है मुझे इस बात की मैं सो तो लेता हूँ,
मेरे हाथों की हर रेखा में मेहनत का पसीना है.

मेरे बच्चों की गुल्लक में भी शायद कुछ नहीं होगा,
मगर संकल्प है मन में कि अपने दम पे जीना है

(3) 

मुझसे नफ़रत भी करते हैं, मेरे दीवाने भी हैं,
उलझी उलझी चाहत के कुछ ऐसे अफ़साने भी हैं.

तन्हाई का शोर जहाँ पर चैन नहीं लेने देता,
जिनमें पूरी दुनिया है कुछ ऐसे वीराने भी हैं.

जिन लोगों ने पत्थर फैंके उनमें कोई ग़ैर नहीं,
क्या बोलूँ सब अपने हैं और जाने पहचाने भी हैं.

कुछ जाने पहचाने साये रहते हैं एक मुद्दत से,
मेरे भीतर सीले-सीले से कुछ तहख़ाने भी हैं.

उनके बारे में सोचूँ तो दिल को राहत मिलती है,
झूठ नहीं बोला करते कुछ ऐसे पैमाने भी हैं.

(4)
 इतना हो, मुझको दुख की परवाह न हो,
मर जाऊँ लेकिन होठों पर आह न हो.

जीने का आनंद इसी जीने में है,
जीना हो लेकिन जीने की राह न हो.

जैसे खुशबू फूलों में बस जाती है,
तुझ में रहूँ और मुझको तेरी चाह न हो.

जितने अँधेरे हैं सब मेरे वश में हैं,
कोई उजाला अब मेरा हमराह न हो.

मेरी गज़लें हैं सच्ची पहचान मेरी,
कोई मेरे चेहरे से गुमराह न हो.

पहले मेरी बस्ती में स्कूल खुले,
बेशक़ उसमें मंदिर या दरगाह न हो.

कोई कुछ भी बोले ये नामुमकिन है,
अच्छे शेर हों लेकिन उन पर वाह न हो

मतदान करो

मतदान कीजिए सभी मतदान कीजिए
इस लोकतंत्र पर्व का सम्मान कीजिए

संसद में जो भी जाए वो आदमी अच्छा हो,
हर शख्स से ये आप आह्वान कीजिए

मतदान करना है जरूरी दान की तरह,
किसी पात्र व्यक्ति को ही ये दान कीजिए

अपराधी आ रहे हैं राजनीति में बहुत,
पूरे न आप उनके अरमान कीजिए

मतदान कीजिए सभी मतदान कीजिए

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- by Prasanna Badan Chaturvedi
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मत दान करो ,कुपात्र को.
मतदान करो , सुपात्र को.


-by Devendra P. Bhatnagar "Vichitra"