इस बजट में सरकारी कर्मचारी उम्मीद लगाये बैठा था कि इनकम टैक्स कि लिमिट बढ़ जाएगी लेकिन चिदम्बरम साहेब ने तो ऐसा झटका दिया कि कर्मचारी बेचारा हैरान रह गया I हो भी क्यों ना महगाई से परेशान तो पहले से था और बजट से जो आस लगाये बैठा था वोह भी टूट गई औए उसकी नौका मजधार में डूब गई I क्या मिला आम जनता को , क्या सरकार को आम जनता से कोई सरोकार नहीं , सरकार भी सोच ले आम आदमी भी जागने लगा है और वोह इसका हिसाब भी करना जानता है , समझ गए ना आप- मैं क्या कहना चाह रहा हूँ - बहुत समझदार है आप , तभी तो आप पॉलिटिशियन है I अरे भाई कभी अभावों में पलने वालो की तरफ देखो , कभी भूंख से तड़पते , इलाज के अभाव में मरते आम आदमी के परिजनों की पीड़ा महसूस करके देखो - अरे मैं तो जज्वाती हो गया ओह क्या हो गया मुझे, अरे भाई तुम्हे क्या लेना देना इन सब से - किसी के घर में चूल्हे जलें या नहीं - आम आदमी का तो यही हाल रहेगा , जब तक स्वांस है बेचाराबेहाल रहेगा I
-अरुण प्रताप सिंह भदौरिया

