खेलें सब संग, होली है.
उडाये पिचकारी, लगाए गुलाल
रंगीन बनाएं होली है
लकडियों का ना नाश करें हम
पौधें लगाएं, होली है
आसमान से जितनी शबनम रोज बरसती है
उससे ज्यादा इस धरती पर धुप बिखरती है
उससे ज्यादा इस धरती पर धुप बिखरती है
अहसासों को कहाँ जरुरत होती भाषा की
खुशबू कितनी ख़ामोशी से बातें करती है
खुशबू कितनी ख़ामोशी से बातें करती है
कुछ सपने तो सारे जीवन शौक मनाते हैं
जब भी दिल में घुटकर कोई ख्वाहिश मरती है
जब भी दिल में घुटकर कोई ख्वाहिश मरती है


