( 1 )
क्रिकेट अब नहीं रहा ,जेंटलमैन का खेल I
सट्टेबाजी हो रही ,खिलाड़ी जा रहे जेल I
अरुण प्रताप सिंह भदौरिया ' राज '
(2)
भ्रस्टाचार का दीमक ,
देश को चाट रहा है I
जातिबाद का बिच्छू ,
एकता में डंक मार रहा है I
महगाई का सांप ,
जनता को काट रहा है I
धन्य है हमारा देश ,
जो दागिओं को,
मंत्री पद बाँट रहा है I
अरुण प्रताप सिंह भदौरिया ' राज '
( 3)
एक आया है तो एक जाएगा I
न साथ लाया था कुछ ,
न साथ कुछ ले जायेगा I
तेरी दौलत का खजाना ,
तेरे काम ना आयेगा I
कुछ तो अच्छा कर ले बन्दे ,
यही तेरे साथ जाएगा I
अरुण प्रताप सिंह भदौरिया ' राज '
( 4 )
रूठना मनाना राजनितिक मजबूरी है ,
जनता को दिखाने के लिए यह भी जरूरी है I
उम्र के इस पड़ाव में लगता है ,
प्रधानमंत्री बने बिना जिंदगी अधूरी है I
अरुण प्रताप सिंह भदौरिया ' राज '
( 5 )
मुह पर कालिख लगी हुई है, फिर भी पद पर बैठे है I
सी बी आई की जांच वो बड़े प्रेम से सहते है I
सत्ता की मदहोशी उनके ऊपर छाई है I
उनके ही दम ने यह सरकार बचाई है I
अरुण प्रताप सिंह भदौरिया 'राज'
( 6 )
जो भाग्य भरोसे रहते है
वो कष्ट हमेशा सहते हैं
जो मेहनत को अपनाते है
वो कामयाब हो जाते हैं
अरुण प्रताप सिंह भदौरिया 'राज'