बुजुर्ग हमारे लिए वट वृक्ष की भांति होते हैं। जो हमें सुरक्षा के साथ ही शीतल छांव जैसा स्नेह भी प्रदान करते हैं। श्राद्ध पक्ष में बुजुर्गो की शिक्षाएं उनके उपदेशों को पुनरावलोकन कर उन्हें आत्मसात करना चाहिए। जिनके माता-पिता जीवित है ऐसे लोगों को श्राद्ध पक्ष में श्रद्धा, सम्मान और समर्पण का संकल्प लेना चाहिए। हमारे माता-पिता भगवान की तरह है, जो हमें ब्रह्मा की तहर जीवन देते है। विष्णु बन हमारा पालन पोषण करते और शिव की तरह हमारी बुराइयों को विष की तरह खुद की पीकर कुविचारों, कुसंस्कारों का शमन करके सुखद भविष्य बनाते हैं। माता-पिता के प्रति श्रद्धा का भाव ही श्राद्ध और उनकी शिक्षाओं को मानना ही तर्पण है।
अरुण प्रताप सिंह, डाकपाल, शाहजहांपुर।
DAINIK JAGRAN - 25-09-2013