खुशियों के आँगन में क्यों,गम के बादल मडराते है I
त्योहारों पर भी अब ,सब आपस में लड़ जाते है I
सेवा है मूल सभी धर्मो का,पाप से बचकर रहना सब I
क्यों हम मानवता के रिश्तों को तार -तार कर जाते है I
- अरुण प्रताप सिंह भदौरिया
त्योहारों पर भी अब ,सब आपस में लड़ जाते है I
सेवा है मूल सभी धर्मो का,पाप से बचकर रहना सब I
क्यों हम मानवता के रिश्तों को तार -तार कर जाते है I
- अरुण प्रताप सिंह भदौरिया