Monday, January 6, 2014

हरिओम पवार की रचना -

मै अदना सा कलमकार हूँ घायल मन की आशा का ,
मेरा कोई ज्ञान नहीं है छंदों की परिभाषा का ,
जो यथार्थ में दीख रहा है मै उसको लिख देता हूँ ,
कोई निर्धन चीख रहा है मै उसको लिख देता हूँ ,
मैंने भूखो को रातों में तारे गिनते देखा है ,
भूखे बच्चों को कचरे में खाना चुगते देखा है ,
मेरा वंश निराला का है स्वाभिमान से जिन्दा हूँ ,
काले धन और... निर्धनता पर मन ही मन शर्मिंदा हूँ ,
मैं शबनम वन्दन के गीत नहीं गाता ,
चन्दन अबिनंदन के गीत नहीं गाता ,
दरबारों के सत्य बताता फिरता हूँ ,
काले धन के तथ्य बताता फिरता हूँ ,
जहाँ हुकूमत का चाबुक कमज़ोर दिखाई देता है ,
काले धन का मौसम आदमखोर दिखाई देता है ………….

काला धन वो धन है जिसका टैक्स बचाया जाता है ,
अक्सर ये धन सात समुंदर पार छिपाया जाता है ,
काले धन की अर्थव्यवस्था निर्धन को पूरा रुलाती है ,
झोपड़ पट्टी के बच्चों को खाली पेट सुलाती है ,
ये निर्धन के हिस्से की इमदादों को खा जाती है ,
मनरेगा के अन्त्योदय के वादों को खा जाती है ,
बॉलीवुड की आधी दुनिया काले धन पर जिंदा है ,
चुपके चुपके चोरी चोरी दो नंबर का धंधा है ,
काले धन की फ़िल्मी दुनिया इन्द्रधनुषी रंगों में है ,
पर दुनिया में हमारी जगह नंगे भिखमंगों में है ,
काले धन के बल पर गुंडे निर्वाचित हो जाते हैं,
भोली भाली भूखी जनता पर गर्वित हो जाते हैं,
जैसे सोमनाथ का मंदिर लूट लिया था गजनी ने,
भूजल जंगल लूट लिया है खनिज खनन की चोरी ने ,
खनन माफिया काले धन के बल पर ऐठे ऐंठे हैं ,
स्विस बैंकों की संदूकों के तालों में जा बैठे हैं ,
गौड़ पार्टीकल खोजी है फ्रौड़ पार्टी कल खोजो ,
जो काले धन के वारिश हैं उनका आज और कल खोजो ,