Sunday, March 28, 2021

स्नेह और सौहार्द का प्रतीक रंगो का त्यौहार होली पर्व!

 रंगों के त्यौहार’ के तौर पर मशहूर होली का त्योहार फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। तेज संगीत और ढोल के बीच एक दूसरे पर रंग और पानी फेंका जाता है। भारत के अन्य त्यौहारों की तरह होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। प्राचीन पौराणिक कथा के अनुसार होली का त्योहार, हिरण्यकश्यप की कहानी जुड़ी है।

हिरण्यकश्यप प्राचीन भारत का एक राजा था जो कि राक्षस की तरह था। वह अपने छोटे भाई की मौत का बदला लेना चाहता था जिसे भगवान विष्णु ने मारा था। इसलिए अपने आप को शक्तिशाली बनाने के लिए उसने सालों तक प्रार्थना की। आखिरकार उसे वरदान मिला। लेकिन इससे हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझने लगा और लोगों से खुद की भगवान की तरह पूजा करने को कहने लगा। इस दुष्ट राजा का एक बेटा था जिसका नाम प्रहलाद था और वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। प्रहलाद ने अपने पिता का कहना कभी नहीं माना और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। बेटे द्वारा अपनी पूजा ना करने से नाराज उस राजा ने अपने बेटे को मारने का निर्णय किया। उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए क्योंकि होलिका आग में जल नहीं सकती थी। उनकी योजना प्रहलाद को जलाने की थी, लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हो सकी क्योंकि प्रहलाद सारा समय भगवान विष्णु का नाम लेता रहा और बच गया पर होलिका जलकर राख हो गई। होलिका की ये हार बुराई के नष्ट होने का प्रतीक है। इसके बाद भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया, इसलिए होली का त्योहार, होलिका की मौत की कहानी से जुड़ा हुआ है। इसके चलते भारत के कुछ राज्यों में होली से एक दिन पहले बुराई के अंत के प्रतीक के तौर पर होली जलाई जाती है।

यह कहानी भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण के समय तक जाती है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण रंगों से होली मनाते थे, इसलिए होली का त्योहार रंगों के रूप में लोकप्रिय हुआ। वे वृंदावन और गोकुल में अपने साथियों के साथ होली मनाते थे। वे पूरे गांव में मज़ाक भरी शैतानियां करते थे। आज भी वृंदावन जैसी मस्ती भरी होली कहीं नहीं मनाई जाती।

होली वसंत का त्यौहार है और इसके आने पर सर्दियां खत्म होती हैं। कुछ हिस्सों में इस त्यौहार का संबंध वसंत की फसल पकने से भी है। किसान अच्छी फसल पैदा होने की खुशी में होली मनाते हैं। होली को ‘वसंत महोत्सव’ या ‘काम महोत्सव’ भी कहा जाता है!

प्राचीन भारत के मंदिरों की दीवारों पर भी होली की मूर्तियां बनी हैं। ऐसा ही 16वीं सदी का एक मंदिर विजयनगर की राजधानी हंपी में है। इस मंदिर में होली के कई दृश्य हैं जिसमें राजकुमार, राजकुमारी अपने दासों सहित एक दूसरे पर रंग लगा रहे हैं।

कई मध्ययुगीन चित्र, जैसे 16वीं सदी के अहमदनगर चित्र, मेवाड़ पेंटिंग, बूंदी के लघु चित्र, सब में अलग अलग तरह होली मनाते देखा जा सकता है।

पहले होली के रंग टेसू या पलाश के फूलों से बनते थे और उन्हें गुलाल कहा जाता था। वो रंग त्वचा के लिए बहुत अच्छे होते थे क्योंकि उनमें कोई रसायन नहीं होता था। लेकिन समय के साथ रंगों की परिभाषा बदलती गई। आज के समय में लोग रंग के नाम पर कठोर रसायन का उपयोग करते हैं। इन खराब रंगों के चलते ही कई लोगों ने होली खेलना छोड़ दिया है। हमें इस पुराने त्यौहार को इसके सच्चे स्वरुप में ही मनाना चाहिए।(साभार) 






Saturday, March 27, 2021

किरदार ऐसा जियो कि दुनियाँ याद करे!

 















रंगमंच है दुनियाँ सारी, किरदार हमें निभाना है.... 

आप सभी को विश्व रंगमंच दिवस की हार्दिक शुभकामनाये🌹

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अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान द्वारा 1961 इस दिन को मनाने की शुरुआत की गई। इस अवसर पर किसी एक देश के रंगकर्मी द्वारा विश्व रंगमंच दिवस के लिए आधिकारिक सन्देश जारी किया जाता है। 1962 में फ्रांस के जीन काक्टे पहला अंतरराष्ट्रीय सन्देश देने वाले कलाकार थे। कहा जाता है कि पहला नाटक एथेंस में एक्रोप्लिस में स्थित थिएटर ऑफ डायोनिसस में आयोजित हुआ था। यह नाटक पांचवीं शताब्दी के शुरुआती दौर का माना जाता है। इसके बाद रंगमंच पूरे ग्रीस में बहुत तेज़ी से फैला। 

इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों में रंगमंच को लेकर जागरुकता लाना और रंगमंच के महत्व को समझाना है। रंगमंच न सिर्फ लोगों का मनोरंजन करता है बल्कि उन्हें सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक भी करता है। जिस देश के कलाकार का संदेश इस दिन प्रस्तुत किया जाता है जिसका लगभग 50 भाषाओं में अनुवाद किया जाता है और दुनियाभर के समाचार-पत्रों में वह छपता है। 

     भारत में रंगमंच का इतिहास बहुत पुराना माना है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि नाट्यकला का विकास सबसे पहले भारत में ही हुआ। ऋग्वेद के कतिपय सूत्रों में यम और यमी, पुरुरवा और उर्वशी आदि के कुछ संवाद हैं। इन संवादों को पढ़कर कई विद्वानों का कहना है कि नाटक की शुरुआत यहीं से हुई ! 

माना जाता है कि भरतमुनि ने नाट्यकला को शास्त्रीय रूप दिया है। भरत मुनि ने अपने नाट्यशास्त्र में नाटकों के विकास की प्रक्रिया को लिखा है, "नाट्यकला की उत्पत्ति दैवी हैं, अर्थात दु:खरहित सतयुग बीत जाने पर त्रेतायुग के आरंभ में देवताओं ने ब्रह्मा से मनोरंजन का कोई ऐसा साधन उत्पन्न करने की प्रार्थना की जिससे देवता लोग अपना दु:ख भूल सकें और आनंद प्राप्त कर सकें।(साभार)

Tuesday, March 23, 2021

भारत माता के वीर सपूतों को मेरा सलाम!

      


आज ही की तारीख में 23 मार्च 1931 को क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी। भारतवर्ष को आजाद कराने के लिए इन वीर सपूतों में हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया था, इसलिए इस दिन को शहीद दिवस कहा जाता है। भगत सिंह और उनके साथी राजगुरु और सुखदेव को फांसी दिया जाना हमारे देश इतिहास की बड़ी एवं महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है।

       भारत के इन महान सपूतों को ब्रिटिश हुकूमत ने लाहौर जेल में फांसी पर लटकाया था। इन स्वंतत्रता सेनानियों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अंग्रेजों ने इन तीनों को तय तारीख से पहले ही फांसी दे दी थी। तीनों को 24 मार्च को फांसी दी जानी था। मगर देश में जनाक्रोश को देखते हुए गुप-चुप तरीके से एक दिन पहले ही फांसी पर लटका दिया गया। पूरी फांसी की प्रक्रिया को गुप्त रखा गया था। 

      महान क्रांतिकारियों की पुण्य तिथि पर उनको शत् शत् नमन! 

Saturday, March 20, 2021

अनवर फर्रुखाबादी 'फना'


       जिन्हें हम भूल गए और जो हमारे बीच से चले गए ऐसी शख्सियत है अनवर फर्रुखाबादी ।

अनवर फर्रुखाबादी को फर्रुखाबाद के लोग ही नहीं जानते है।  

अनवर फर्रुखाबादी'फना' का जन्म मोहल्ला नखास फर्रुखाबाद में 19 जुलाई 1928 में हुआ गरीब परिवार में जन्मे अनवर साहब को शायरी का शौक अपने वालिद हाफिज अशफाक हुसैन से विरासत में मिला। 19 साल की उम्र में  छपाई कारीगर अनवर हुसैन रोजगार की तलाश में मुंबई पहुंचे और वहां उनकी मुलाकात उस जमाने के मशहूर कव्वाल इस्माइल आजाद से हुई ।अनवर साहब की पहचान बॉलीवुड में गीतकार के रूप में अनवर फर्रुखाबादी के नाम से  हुई। अनवर साहब ने बॉलीवुड में लगभग 2000 गीत,  गजल,कव्वाली का सृजन किया। उनके गीतों को मन्नाडे,पंकज उधास, शंकर शंभू और साबिर बंधुओं के अलावा उस वक्त के सभी नामी गायकों ने अपनी आवाज दी। 

 वर्ष 1992 में अनवर साहब फर्रुखाबाद आ गए और 82 वर्ष की उम्र में 29जून 2011 को इस दुनिया से इस विदा हो गए

अनवर साहब के कुछ लोकप्रिय गीत और गजल-

* हमें तो लूट लिया मिलके हुस्न वालों ने

* जिंदगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात

* हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं

* यह जो हल्का-हल्का सुरूर है

* सबको मालूम है मैं शराबी नहीं

ऐसी महान शख्सियत को मेरी श्रद्धांजलि।

        अरुण प्रताप सिंह भदौरिया

              मो.9450913131

Translation: Anwar Farrukhabadi 'Fana'

     Those whom we have forgotten and who have left us, such a person is Anwar Farrukhabadi.

The people of Farrukhabad are not known to Anwar Farrukhabad.

Born Anwar Farrukhabadi'Safna 'in Mohalla Nakhas Farrukhabad on 19 July 1928, Anwar Saheb inherited Shayari from his father Hafiz Ashfaq Hussain. At the age of 19, the printing artisan Anwar Hussain arrived in Mumbai in search of employment and there he met the then famous Qawwal Ismail Azad. Anwar Saheb was identified as Anwar Farrukhabadi as a lyricist in Bollywood. Anwar Sahab composed about 2000 songs in Bollywood, Ghazal, Qawwali. His songs were sung by all the renowned singers of that time, apart from Mannade, Pankaj Udhas, Shankar Shambhu and Sabir brothers.

 In 1992, Anwar Saheb came to Farrukhabad and left this world on 29 June 2011 at the age of 82.

Some popular songs and ghazals of Anwar Sahab

* Hame to loot liya milke Hushn walo ne

* Zindagi Bhar nahi bhoolegi wo barsat ki raat

* Ham kale hai to kya hua .. Dilwale hai

* Ye jo halka halka suroor hai..

* Sabko maaloom hai mai sharabi nahi

My tribute to such a great personality.

        Arun Pratap Singh Bhadoria

              Mo.9450913131

जिंदगी की अंधी दौड़ से बच्चों को बचायें!


 

Wednesday, March 10, 2021

सत्य ही शिव है, शिव ही सुंदर है !

 

       आदिदेव पशुपति शिव भोले भंडारी सहित अनेक नामों से हम अपने आराध्य शिव शंकर की स्तुति करते हैं !  
महाशिवरात्रि का पर्व अध्यात्म पथ पर चलने वाले साधकों के लिए  महत्वपूर्ण है! यह उनके लिए भी महत्वपूर्ण है जो पारिवारिक परिस्थितियों में हैं ! पारिवारिक परिस्थितियों  वाले लोग महाशिवरात्रि को शिव विवाह के उत्सव के रूप में मनाते हैं! यौगिक परंपरा में शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता है. उन्हे आदि गुरु माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि ध्यान की अनेक सहेस्त्राब्दियों के बाद, एक दिन वह पूर्ण रूप से स्थिर हो गये. इस लिये साधक महा शिव रात्रि को स्थिरता की रात्रि के रूप में मनाते है!
आप अपनी आंखें खोल कर आसपास देखें तो आप केवल विशाल वस्तुओ को देख सकते हैऔर यदि आपके पास सूक्ष्मदर्शी है तो आप बहुत सारी रचना देख सकेंगे ! उदाहरण के तौर पर आकाशगंगा दिखाई देती है परंतु उसे थामें रहने वाली शक्ति सभी लोगों को दिखाई नहीं देती है! जब लोग अपना कल्याण चाहते हैं तो दीपक को प्रकाश के रूप में दर्शाते हैं! एक ओर शिव संहारक कहलाते हैं और दूसरी और वे सबसे अधिक करुणामई भी है योगी कथा में वे अनेक स्थानों पर महाकरुणामई के रूप में सामने आते है!
शिवपुराण में वर्णित शिवजी के निराकार स्वरूप का प्रतीक लिंग शिवरात्रि की पावन तिथि की महानिशा में प्रकट होकर सर्वप्रथम ब्रह्मा विष्णु के द्वारा पूजा गया।  फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि को आदि देव भगवान शिव करोड़ों सूर्यो के समान प्रभाव वाले ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रगट हुए थे, महाशिवरात्रि का शिव तत्व से घनिष्ठ संबंध है, यह पर्व शिव के  दिव्य अवतरण का मंगल सूचक है, उनके निराकार से साकार रूप में अवतरण की रात्रि  ही  महाशिवरात्रि कहलाती है, यह रात्रि हमें काम, क्रोध मोह, मत्सर आदि विकारों से मुक्त करके परम सुख शांति एवं ऐश्वर्य प्रदान करती है, वातावरण सहित घूमती धरती या अनंत ब्रह्मांड का अक्स ही लिंग है, इसलिए इसका आदि व अंत देवताओं तक के लिए अज्ञात है ,सौरमंडल के ग्रहों के घूमने की कक्षा ही सिर के तन पर लिपटे सर्प हैं ,सूर्य चंद्रमा अग्नि ही उनके तीन नेत्र हैं, बादलों के झुरमुट जटाएं ,आकाश जल ही सिर पर स्थित गंगा, और सारा ब्रह्मांड ही उनका शरीर है । मानवीकरण में वायु, प्राण, 10 दिशाएं पंचमुखी महादेव के दस कान, हृदय सारा विश्व, सूर्य नाभि ,और अमृत यानी जलयुक्त कमंडल हाथ में रहता है शून्य आकाश अनंत ब्रह्मांड और निराकार परम पुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है ,आकाश स्वयं लिंग है, धरती उसका आधार  है, सब अनंत सून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा गया है, भगवान शिव की अपारशक्ति और भक्ति का पर्व महाशिवरात्रि ! पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस रात्रि में जो धर्म कर्म मांगलिक अनुष्ठान अथवा संकल्पित कार्य किए जाते हैं, उनका फल अक्षुण्य रहता है!
आप सभी पर भोले बाबा अपनी कृपा बनाये रखे!🌹
अरुण प्रताप सिंह भदौरिया
(कवि, लेखक,रंगकर्मी, ब्लॉगर, समाजसेवी, फिलेटलिस्ट,
सिने एक्टर, फ़ाइनेंसिएल एडवाइजर, मोटीवेशनल स्पीकर, मंच संचालक, ट्रेड यूनियन लीडर, शार्ट फ़िल्म मेकर)
पोस्ट मास्टर (HSG-I)
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Monday, March 8, 2021

सामाजिक संस्था टीम ए.पी. ने विश्व महिला दिवस पर महिला कर्मचारियो को किया सम्मानित! Social organization Team A.P. Honored women employees on World Women's Day!


 सामाजिक सरोकारों से  जुड़ी संस्था टीम ए.पी. के तत्वाधान में आज विश्व महिला दिवस के  सुअवसर पर मातृशक्ति को नमन करने हेतु  शहर के आकांक्षा  विद्यालय  में  संस्था के प्रमुख  अरूण प्रताप सिंह भदौरिया द्वारा एक  कार्यक्रम  का आयोजन किया गया.  उनके द्वारा  मातृशक्ति को प्रणाम करते हुए भारतीय समाज में महिलाओं की  बढ़ती शक्ति और गरिमा की उपादेयता की विशुद्ध महिमा का वर्णन किया गया l   टीम ए.पी. के सदस्य सोहन लाल तिवारी ने महिलाओं के गृहणी से लेकर कार्यालयी गणवेश में निभाई जाने वाली भूमिका की सराहना की!सक्रिय सदस्य  मयंक गुप्ता जी ने महिलाओं के लिए भविष्य में आने वाले अवसरों पर प्रकाश डालते हुए बालिका शिक्षा पर विशेष जोर दिया ,उन्होंने कहा शिक्षा ही स्वावलंबी जीवन का आधार है ! टीम सदस्य प्रमोद श्रीवास्तवय ने कहा प्रत्येक महिला आदर्श मां, बहन, पत्नी का रूप स्वयं में जीती हैं. और असत्य के विनाश के लिए आदि शक्ति के रूप मे अवतरण भी चरितार्थ करती है!,इस अवसर पर सामाजिक संस्था द्वारा स्वावलंबी महिला श्रीमती संगीता श्रीवास्तव (उप- डाकपाल ocf महिला पोस्ट आफिस शाहजहाँपुर) व सुश्री अपर्णा पांडे (डाक सहायक  प्रधान डाक घर शाहजहांपुर ) को उनके सराहनीय कार्यो हेतु सम्मानित किया गया! इस अवसर पर श्री आनंद अग्रवाल ने उपरोक्त दोनों  लोगों की भूरि भूरि प्रशंसा कीIकार्यक्रम के समापन उद्बोधन में श्री अभिज्ञान मिश्र ने गार्गी जैसे विदुषी महिलाओ का वर्णन करते हुए समाज मे  उनकी उपादेयता को सामाजिक जीवन का मेरुदंड की उपमा दी, उन्होंने कहा महिलाये भावनाओं को मूर्त रूप देने वाली कुशल शिल्पी है! अंत मे श्री अरुण प्रताप सिंह  ने महिला शक्ति को प्रणाम करते हुए दोनों महिलाओं का धन्यबाद दिया जिनके कारण आज के कुशल कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ! सभी सदस्यों ने सामाजिक  संस्था टीम ए.पी.के बैनर तले,भविष्य में स्त्री शिक्षा को बढ़ाने हेतु  व नशा मुक्ति हेतु सामूहिक कदम उठाने की प्रतिज्ञा की!

The organization team AP associated with social concerns Today, a program was organized by the head of the Team AP  Arun Pratap Singh Bhadauria at the Akanksha Vidyalaya of the city to greet the mother power on the occasion of World Women's Day. He described the pure glory of increasing power and dignity of women in Indian society while paying homage to their mother power. Team Member Sohan Lal Tiwari appreciated the role played by women from housewives to official uniforms! Active member Mayank Gupta gave special emphasis on girl education, highlighting the future opportunities for women, she said education It is the basis of self-supporting life! Team member Pramod Shrivastava said that each woman lives as an ideal mother, sister and wife. And for the destruction of untruth, it also deserves to be described as Adi Shakti !, on this occasion, by the social organization, Smt.Sangeeta Srivastava Sub Post Master OCF Mahila Post Office Shahjahanpur) And Km. Aparna Pandey (Postal Assistant) was honored for his commendable work!
On this occasion, Mr. Anand Agarwal praised both the above people. In the concluding address of the program, Mr. Abhigyan Mishra described  women like Gargi as their menace in social life, he said that women have tangible feelings Is a skilled craftsman to create! In the end, Shri Arun Pratap Singh paid his respects to the women power and thanked both the women due to which the efficient program of today was successfully organized. All the members, under the banner of social organization TeamAP pledged to take collective steps to increase women's education in the future and for de-addiction.







Sunday, March 7, 2021

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day)

 


    प्रति वर्ष 8 मार्च को महिलाओं के सम्मान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Da ) मनाया जाता है! इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सम्मान और अधिकार के प्रति लोगों को जागरूक करना है! इस दिन दफ्तरों, स्कूल, सरकारी संस्थानों आदि जगहों पर महिलाओं का सम्मान भी किया जाता है, ताकि वो इस दिन खास महसूस कर सकेI

साल 2021 की बात की जाए तो इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को 'Women in leadership: an equal future in a COVID-19 world' की थीम पर मनाया जा रहा है! महिला नेतृत्व: COVID-19 की दुनिया में एक समान भविष्य को प्राप्त करना' विषय कोविड परिस्थितयों के बीच चुना गया है! गौरतलब है कि इस वर्ष यह थीम COVID-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य देखभाल श्रमिकों, इनोवेटर आदि के रूप में दुनियाभर में लड़कियों और महिलाओं के योगदान को हाईलाइट करने के लिए रखी गई है! 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का प्रारंभ  1908 में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर से हुआ था! ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक एक महिला मजदूर आंदोलन के कारण अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की नींव रखी गई थी! तब 15000 से अधिक महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर प्रदर्शन किया था. आंदोलन करने वाली महिलाओं की मांग थी कि काम के घंटे कम किए जाए, सैलरी में बढ़ोतरी की जाए और साथ में वोटिंग का भी अधिकार दिया जाए!पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस थीम के साथ साल 1996 में मनाया गया था और उस वक्त 'अतीत का जश्न, भविष्य की योजना' की थीम संयुक्त राष्ट्र ने रखी थी! 

   रूस, चीन, कंबोडिया, नेपाल और जार्जिया जैसे कई देशों में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन अवकाश रहता है! चीन में महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन काम से आधे दिन का अवकाश मिलता है! 

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 अर्ध सत्य तुम, अर्ध स्वप्न तुम, अर्ध निराशा आशा, 

अर्ध अजित जित,अर्ध तृप्ति तुम, अर्ध अतृप्ति पिपासा, 

आधी काया आग तुम्हारी,आधी काया पानी, 

अर्धांगिनी नारी तुम जीवन की आधी परिभाषा! 

          महिला दिवस की शुभकामनाएं! 


                     Arun Pratap Singh Bhadaouria






और...इस तरह हुईं टीम ए.पी. की शुरुआत....

 मैं अकेला ही चला था मंजिले जानिब मगर ......दोस्त मिलते गए कारवां बनता गया ...

बात वर्ष 2019 की है मैं शाहाबाद ( हरदोई)पोस्ट आफिस में कार्यरत था आफिस मे होली पर कार्यक्रम बना कि होली के अवसर पर रंगोत्सव मनाया जाये जिसमे डिनर भी शामिल था ! सभी सहमत हो गये और प्रोग्राम तय हो गया! उसी समय मेरे मन में आया कि हम लोग तो पार्टी करके होली मनाएं ये ठीक है पर इसके साथ ही कोई सामाजिक कार्य किसी का सहयोग या जरूरतमंद की कुछ सहायता करके उसके साथ होली की खुशियाँ बाटी जाएं तो और भी बेहतर होगा ! मैंने इस संबंध में अपनी बात रखी..सभी ने कहा इससे अच्छा क्या हो सकता है! वहां उपस्थित एक मित्र सचिन सिंह ने बताया कि उनके घर के पास एक बुजुर्ग महिला अकेली रहती है जो निराश्रित हैं एक छोटी सी कोठरी जिसकी छत पर फटा त्रिपाल पड़ा है उसमे वो रहती है ! मोहल्ले वाले उन्हे जो खाने को दे देते है वो खा लेती है!हम सबको कुछ उनके लिए करना चाहिए ! तत्काल ही हम लोगों ने निर्णय लिया  और एक माह का राशन नई धोती ब्लाउज पेटीकोट चप्पल तेल साबुन कंघा आदि उनके घर जाकर इस आश्वासन के साथ उन्हे भेट किया कि आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो  अब से हम उसे पूरा करेगें!  उन्होंने हम सभी पर दुआओं की बरसात कर दी! मेरे सिर पर हाथ रखकर जो दुआ उन्होंने दी वो अमूल्य थी! मेरा ह्रदय द्रवित था ! कोठरी की छत पर फटे त्रिपाल  को देख कर मेरा मन व्यथित था!... मैने वही पर अपने साथियो से  कहा यहाँ छत पर टींन शेड डालने का मैने संकल्प लिया है! ताकि माता जी  इस बरसात मे परेशानी न उठाये! सभी ने इस नेक काम मे पूरा सहयोग किया और कुछ समय के बाद छत पर टीन पड़ गयी!

      कुछ माह तक ईश्वर की कृपा से उनके जीवन यापन की व्यवस्था हम सब के द्वारा चलायी जाती रही ... एक दिन पता लगा कि उनकी बेटी जो विवाहित थी आकर उन्हे अपने साथ लेकर चली गई! ईश्वर ने उनकी सेवा का  अवसर हम सबको दिया..ये हमारा सौभाग्य था! वो जहां भी रहे स्वस्थ और खुश रहे! 

.........और इस नेक काम के साथ ईश्वर की कृपा से  हुई टीम ए.पी. की शुरूआत!  .... कोशिश आज भी जारी है... कुछ करते रहने की!