मैं अकेला ही चला था मंजिले जानिब मगर ......दोस्त मिलते गए कारवां बनता गया ...
बात वर्ष 2019 की है मैं शाहाबाद ( हरदोई)पोस्ट आफिस में कार्यरत था आफिस मे होली पर कार्यक्रम बना कि होली के अवसर पर रंगोत्सव मनाया जाये जिसमे डिनर भी शामिल था ! सभी सहमत हो गये और प्रोग्राम तय हो गया! उसी समय मेरे मन में आया कि हम लोग तो पार्टी करके होली मनाएं ये ठीक है पर इसके साथ ही कोई सामाजिक कार्य किसी का सहयोग या जरूरतमंद की कुछ सहायता करके उसके साथ होली की खुशियाँ बाटी जाएं तो और भी बेहतर होगा ! मैंने इस संबंध में अपनी बात रखी..सभी ने कहा इससे अच्छा क्या हो सकता है! वहां उपस्थित एक मित्र सचिन सिंह ने बताया कि उनके घर के पास एक बुजुर्ग महिला अकेली रहती है जो निराश्रित हैं एक छोटी सी कोठरी जिसकी छत पर फटा त्रिपाल पड़ा है उसमे वो रहती है ! मोहल्ले वाले उन्हे जो खाने को दे देते है वो खा लेती है!हम सबको कुछ उनके लिए करना चाहिए ! तत्काल ही हम लोगों ने निर्णय लिया और एक माह का राशन नई धोती ब्लाउज पेटीकोट चप्पल तेल साबुन कंघा आदि उनके घर जाकर इस आश्वासन के साथ उन्हे भेट किया कि आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो अब से हम उसे पूरा करेगें! उन्होंने हम सभी पर दुआओं की बरसात कर दी! मेरे सिर पर हाथ रखकर जो दुआ उन्होंने दी वो अमूल्य थी! मेरा ह्रदय द्रवित था ! कोठरी की छत पर फटे त्रिपाल को देख कर मेरा मन व्यथित था!... मैने वही पर अपने साथियो से कहा यहाँ छत पर टींन शेड डालने का मैने संकल्प लिया है! ताकि माता जी इस बरसात मे परेशानी न उठाये! सभी ने इस नेक काम मे पूरा सहयोग किया और कुछ समय के बाद छत पर टीन पड़ गयी!
कुछ माह तक ईश्वर की कृपा से उनके जीवन यापन की व्यवस्था हम सब के द्वारा चलायी जाती रही ... एक दिन पता लगा कि उनकी बेटी जो विवाहित थी आकर उन्हे अपने साथ लेकर चली गई! ईश्वर ने उनकी सेवा का अवसर हम सबको दिया..ये हमारा सौभाग्य था! वो जहां भी रहे स्वस्थ और खुश रहे!
.........और इस नेक काम के साथ ईश्वर की कृपा से हुई टीम ए.पी. की शुरूआत! .... कोशिश आज भी जारी है... कुछ करते रहने की!
