Monday, December 31, 2012
Saturday, December 29, 2012
स्वार्थी नहीं सहयोगी बनें
Let’s cooperate
मित्रों,संत कवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने महाकाव्य “श्रीरामचरितमानस” में लिखा है कि हमारा
शरीर पांच तत्त्वों से बना है और वे
तत्त्व हैं – क्षिति,जल,पावक,गगन,समीरा अर्थात् धरती, पानी, अग्नि, आकाश
एवं वायु | ये पाँचों तत्त्व सदैव पारस्परिक सहयोग एवं सेवा भाव से कर्म
करते हुए सृष्टि का संतुलन बनाए रखते हैं | इस तरह जगत् में जीवन के
प्रादुर्भाव से पूर्व ही प्रकृति ने उसके लिए उचित क्षेत्र निर्माण कर रखा
है जिसके माध्यम से प्राणियों का अस्तित्व बना रहता है और विकास होता रहता
है |वस्तुतः, ये ही ब्रह्मांड की वे शक्तियाँ हैं जिनके आधार पर
सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी ने अन्य प्राणियों के साथ-साथ मनुष्य की रचना की |
जिस तरह ये शक्तियाँ और प्राकृतिक घटनाचक्र अपने आप समर्पणभाव से सबकी सेवा
में संलग्न रहता है, उसी ‘सेवा की भावना’, ‘पारस्परिक-सहयोग’ तथा ‘यज्ञ
करने की क्षमता’ के द्वारा मानव को ब्रह्मा जी ने वृद्धिप्राप्ति का वरदान
भी दिया | श्रीमद्भगवद्गीता के तीसरे अध्याय के दसवें श्लोक में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने ब्रह्मा
जी के इसी वरदान को “कामधुक्” की संज्ञा दी है अर्थात् यदि समाज में सब
लोग परस्पर सहयोग, समर्पणभाव एवं अनुशासन में रहकर ,अनासक्ति तथा त्याग की
भावना से कर्म करें तो समाज दारिद्र्य और दुखों से मुक्त हो सकेगा | हमारे
लिए लक्ष्य-प्राप्ति भी अप्राप्य नहीं रहेगी |
स्मरणीय है कि “यज्ञ” शब्द का अर्थ हमारे
वे सभी कर्म हैं जो हम अपने साथ-साथ औरों के कल्याण के लिए ,परस्पर सहयोग
से अनुशासन में रहकर किया करते हैं | दूसरे, पौराणिक कथाओं के अनुसार
कामधुक् अर्थात् कामधेनु ऋषियों की गाय थी जो सब इच्छाओं की पूर्ति करती थी
|
मनुष्य को स्वेच्छा से कर्म करने की
स्वतन्त्रता ईश्वर ने दी है लेकिन जब कभी भी वह अत्यधिक अहंकार एवं स्वार्थ
से प्रेरित हो कर कर्म करता है ,तो बजाय लक्ष्य सिद्धि के दुःख झेलता है
क्योंकि प्रकृति के सामंजस्य में वह विरोध उत्पन्न करता है | दूसरी ओर, जब
हम किसी भी क्षेत्र में त्याग एवं समर्पण की भावना से प्रेरित हो कर,
पूर्ण मनोयोग से परिश्रम करते हैं, तब उस क्षेत्र की “उत्पादन-क्षमता” हमें
इच्छित फल दिया करती है | अब चाहे तो यह कर्मक्षेत्र सीमा पर घोर कष्टों
को सहने वाले वीर सैनिकों का हो, चाहे किसी फैक्ट्री में काम करने वाले
मजदूरों का हो, चाहे रसोईघर में खाना पकाती माँ का हो,चाहे कपड़ों पर
स्त्री करने वाले धोबी का हो,चाहे स्कूल में पढाने वाले अध्यापक का हो या
फिर कहीं पर भी कोई भी कार्य-क्षेत्र क्यों न हो, बस नियम तो वही लागू हुआ
करता है कि मर्यादा में रहकर, परस्पर सहयोग करते हुए, सेवाभाव से किए जाने
वाले कर्म ही सिद्ध हुआ करते है |
मित्रों, अंतत:, यही कहना चाहती हूँ कि
हममे से किसी को भी सामूहिक प्रयत्न में सहयोग दिये बिना दूसरों के श्रम
का लाभ नहीं उठाना चाहिए क्योंकि समाज का वह व्यक्ति जो उत्पादन अथवा
निर्माण में बिना कोई सहयोग दिए लाभ लेता है ,वह राष्ट्र के लिए भार स्वरूप
होता है |ऐसे व्यक्ति को भगवान् श्री कृष्ण ने तो श्रीमद्भगवद्गीता जी में
‘स्तेन’ अर्थात् चोर की ही संज्ञा दे डाली है | इसलिए मित्रों, “सहयोग में
प्रमाद” कहीं हमारा स्वभाव न बन जाये, इसके प्रति हमें बेहद सतर्क रहना
होगा और स्मरण रखना होगा कि जिन तत्त्वों से हम बने हैं, जिनके साथ और
जिनके बीच रहकर जीवन-यापन किया करते हैं तथा अंततः जिन में विलीन हो जाते
हैं ,वे तत्त्व ही हमें स्वस्थ जीवन-यापन की शैलियों का मूक-परिचय दिया
करते हैं , और सन्देश देते हैं कि हम स्वार्थी नहीं सहयोगी बनें।
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Monday, December 17, 2012
समन्वय समिति की बैठक दिनांक 17-12-2012
समन्वय समिति की बैठक दिनांक17-12-2012 को हुई जिसमे दिनांक 12-12-2012 को देश व्यापी एक दिवसीय हड़ताल में पोस्टल यूनियन द्वारा की गई बेमिशाल हड़ताल के लिए मंडलीय सचिव सुरेन्द्र सिंह चौहान सहित सभी डाक कर्मियो को समन्वय समिति की ओर से बधाई दी गई , समिति के अधिवेसन के लिए सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया ,समिति का अधिवेशन दिनांक26-01-2013 को 11.00 बजे प्रधान डाकघर स्थित पोस्टल यूनियन के कार्यालय में संपन्न होगा , समिति महामंत्री अरुण प्रताप सिंह ने कहा आप सभी के सहयोग से समन्वय समिति को एक नया मुकाम मिला ,समिति प्रेसीडेंट कल्याण राम ने कहा केंद्रीय कर्मचारियो की उपेक्चा कदापि वर्दास्त नहीं की जाएगी , वर्किंग प्रेसीडेंट सुरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा सातवे वेतन आयोग के लिए लड़ाई सुरु हो गई है केंद्रीय कर्मचारियो का वेतन निर्धारण पांच साल में होना चाहिए ,वाइस प्रेसीडेंट इकरार हुसैन ने कहा आने वाले समय में केंद्रीय कर्मचारी एक लम्बे संघेर्ष के लिए तैयार रहे , बैठक में भाग लेने वालो में सुरेश चन्द्र सक्सेना ,यच० यस ० थापा ,यूनुस इदरीसी ,अनूप वैश्य ,राकेश कुमार सक्सेना ,साहिद सिददीकी ,के० के०शुक्ला ,प्रमोद श्रीवास्तव ,मुंशी लाल,देवकी नंदन यादव ,इंद्र प्रकाश, राजवीर ,मो० वसीम ,राजेंद्र कुमार ,विष्णु दत्त मिश्र, विश्राम सागर मिश्रा , मंसूब,चंद्रोदय कुमार सिंह, राघवेन्द्र प्रताप सिंह,मनीष भट्ट आदि थे
PHOTO- A.P.SINGH
Sunday, December 16, 2012
12-12-12को हड़ताल पर रहे डाक कर्मचारी
शाहजहांपुर : केंद्रीय आह्वान पर आल इंडिया पोस्टल इम्प्लाइज यूनियन के पदाधिकारी बुधवार को हड़ताल पर रहे। सुबह से ही कर्मचारी प्रधान डाकघर के गेट पर एकत्रित हो गए और अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की।
हड़ताल का नेतृत्व आल इंडिया पोस्टल इम्प्लाइज यूनियन ग्रुप सी के मंडलीय सचिव सुरेंद्र कुमार सिंह चौहान ने किया तथा संचालन अखिल भारतीय केंद्रीय कर्मचारी समन्वय समिति के महामंत्री तथा पोस्टल यूनियन के सहायक मंडलीय सचिव अरुण प्रताप सिंह ने किया।
हड़ताल से प्रधान डाकघर का पूरा काम काम ठप रहा तथा उपडाकघर एसी फैक्ट्री, सदर बाजार, शाहजहांपुर आरएस, हास्पिटल रोड में भी कार्य ठप रहा।
प्रधान डाकघर के गेट पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए आल इंडिया पोस्टल इम्पलाइज यूनियन ग्रुप सी के मंडलीय सचिव सुरेंद्र कुमार सिंह चौहान ने कहा सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों से कर्मचारी त्रस्त हैं। कहा केंद्रीय कर्मचारियों का वेतन संशोधन प्रत्येक 5 साल में होना चाहिए। अपने संबोधन में पोस्टल यूनियन के सहायक मंडलीय सचिव अरुण प्रताप सिंह ने सरकार से अपील की कि केंद्रीय कर्मियों की पंद्रह सूत्रीय मांग पर तत्काल सार्थक हल निकाला जाए अन्यथा कर्मचारी आंदोलित होंगे। मधुबाला श्रीवास्तव ने कहा पेंशन समेत सभी उद्देश्यों के लिए डीए का वेतन के साथ विलय किया जाना चाहिए। पोस्टमैन यूनियन के अध्यक्ष शाहिद सिद्दीकी ने कहा कि ओटीए व नाइट ड्यूटी भत्तों तथा वर्दी के कपड़ों की दरों में संशोधन होना चाहिए। यूनियन के मंडलीय सचिव आशाराम ने कहा सभी खाली पदों को तत्काल भरा जाना चाहिए तथा जरूरत के आधार पर पदों का सृजन होना चाहिए। विष्णुदत्त मिश्र ने कहा कि ग्रामीण डाकसेवकों को नियमित किया जाना चाहिए तथा उन्हें पोस्टमैन रिक्तियों में समायोजित किया जाना चाहिए। ब्रह्मा सिंह ने कहा सभी कर्मचारियों को सेवाकाल में 5 प्रोन्नतियां दी जानी चाहिए तथा ट्रेड यूनियन का उत्पीड़न बंद हो। राकेश कुमार सक्सेना ने कहा सरकारी प्रतिष्ठानों की आउटसोर्सिग, निगमीकरण और निजीकरण बंद होना चाहिए। राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा नई पेंशन योजना तत्काल रद की जानी चाहिए। पेंशन का लाभ सभी कर्मचारियों को समान रूप से दिया जाना चाहिए। हड़ताल में भाग लेने वालों में सुरेंद्र कुमार सिंह चौहान, राकेश कुमार सक्सेना, ब्रह्मा सिंह, मंसूब हसन, ललित अवस्थी, विष्णु दत्त मिश्रा, महेश कुमार, मनीष भट्ट, आशाराम, राघवेंद्र प्रताप सिंह, शैलेंद्र कुमार, रामभरत, भानु प्रताप, प्रशांत गुप्ता, राजेश कुमार, वीरेश कुमार सिंह, रजनीश कुमार शुक्ल, चंद्र प्रकाश, एपी सिंह, शाहिद अली खां, प्रेमपाल अर्जुन बाबू, विश्राम लाल, अजय कुमार सिंह, नत्थू लाल, मोहम्मद शाहिद, राजातुल्लाह, रामसरन सिंह, फूल सिंह, अनिल कुमार, आदि ने भाग लिया।
DAINIK JAGRAN PAGE-2 DTD 13-12-12
PHOTO - A.P.SINGH
PHOTO - A.P.SINGH
Monday, December 10, 2012
१२-१२-१२ की हड़ताल के लिए डाक कर्मी लामबंद
केन्द्रीय आवाहन पर 12-12-12 को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की तैयारी के लिए आल इंडिया पोस्टल एम्प्लाइज यूनियन शाहजहांपुर के पदाधिकारियो ने गेट मीटिंग करके सभी से हड़ताल में भाग लेने की अपील की , गेट मीटिंग का संचालन समन्वय समिति के महामंत्री एवम पोस्टल यूनियन के सहायक मंडलीय सचिव अरुण प्रताप ने किया , पोस्टल यूनियन ग्रुप सी के मंडलीय सचिव एवं समन्वय समिति के कार्यकारी अध्यछ सुरेन्द्र कुमार चौहान ,मधु बाला श्रीवास्तव ,प्रशांत गुप्ता ,ब्रह्मा सिंह ,संतराम रवि मोहन, राकेश कुमार सक्सेना ,राघवेन्द्र प्रताप सिंह ,सुजतुल्ला ,चन्द्र प्रकाश ,अनिल कुमार ,संगीता श्रीवास्तव ,मंजू श्रीवास्तव ,मंजू कश्यप,,प्रत्युष,सोनी सिंह ,मनीष भट्ट ,साहिद सिद्दीकी ,विश्राम सागेर मिश्र ,राम भरत ,विष्णु दत्त मिश्रा ,आशा राम, जगदीश प्रसाद सहित काफी संख्या में कर्मचारियो ने भाग लिया
दिनांक -11-12-2012 स्थान -प्रधान डाकघर ,शाहजहांपुर (उ 0प्र 0)
फोटो - राघवेन्द्र प्रताप सिंह
Wednesday, December 5, 2012
हँसने के पाँच फायदे
हँसने के पाँच फायदे
आज की भाग दौङ भरी जिंदगी, ऊपर से काम का प्रेशर हममे में से कई लोगों को तो याद भी न होगा कि पिछली बार कब खिलखिला कर हँसे थे। जबकी हँसना हम सभी के लिये अति महत्वपूर्ण है किन्तु हम उसे नजर अंदाज कर देते हैं। मित्रों हँसने से हमारी जिंदगी किस तरह स्वस्थ एवं खुशनुमा हो सकती है उसी के बारे में थोङी सी जानकारी शेयर करने की कोशिश कर रहI हूँ , पसन्द आए तो हँसियेगा जरूर. तो आइये जानते हैं हंसने के पाँच फायदे:
1) हंसने से हद्रय की एक्सरसाइज हो जाती है। रक्त का संचार अच्छीतरह होता है। हँसने पर शरीर से एंडोर्फिन रसायन निकलता है, ये द्रव्य ह्रदय को मजबूत बनाता है। हँसने से हार्ट-अटैक की संभावना कम हो जाती है।
2) एक रिसर्च के अनुसार ऑक्सीजन की उपस्थिती में कैंसर कोशिका और कई प्रकार के हानिकारक बैक्टीरिया एवं वायरस नष्ट हो जाते हैं। ऑक्सीजन हमें हँसने से अधिक मात्रा में मिलती है और शरीर का प्रतिरक्षातंत्र भी मजबूत हो जाता है।
3) य़दि सुबह के समय हास्य ध्यान योग किया जाए तो दिन भर प्रसन्नता रहती है। यदि रात में ये योग किया जाये तो नींद अच्छी आती है। हास्य योग से हमारे शरीर में कई प्रकार के हारमोंस का स्राव होता है, जिससे मधुमेह, पीठ-दर्द एवं तनाव से पीङित व्यक्तियों को लाभ होता है।
4) हँसने से सकारत्मक ऊर्जा भी बढती है, खुशहाल सुबह से ऑफिस का माहौल भी खुशनुमा होता है। तो दोस्तों, क्यों न हम सब दो चार चुटकुले पढ कर या सुनकर अपने दिन की शुरुवात जोरदार हँसी के साथ करें।
5) रोज एक घंटा हँसने से 400 कैलोरी ऊर्जा की खपत होती है, जिससे मोटापा भी काबू में रहता है। आज कल कई हास्य क्लब भी तनाव भरी जिंदगी को हँसी के माध्यम से दूर करने का कार्य कर रहे हैं।
दोस्तों प्रकृति भी हमें संदेश देती है- बारिश के बाद खिली धूप, खिला हुआ फूल, लहलहाते हरे भरे पेङ अपनी खुशी का एहसास दिलाते हैं। उनकी इसी खुशी को देख कर हम सब का मन भी खुश होता है, उसी तरह जब हम सब खुश एवं स्वस्थ रहेंगे तो अपने आसपास का वातावरण भी खुशनुमा बना सकते हैं। कहते हैं—“Health is above wealth”.
सोचिये अगर जरा सी मुस्कान से फोटो अच्छी आ सकती है तो खुलकर हँसने से जिंदगी की तस्वीर कितनी खूबसूरत हो सकती है। मित्रों जब स्वास्थ और सामाजिक क्षेत्र में हँसी के अनगिनत फायदें हैं, तो हँसना तो लाजमी है।
Keep Smiling
****** आप हमेशा हँसते रहे किन्तु दुसरो पर कभी ना हँसे ********
Tuesday, December 4, 2012
Swami Vivekanada Chicago Speech in Hindi
आज हम आपके साथ Swami Vivekananda द्वारा,1893 में Parliament of Religions, Chicago में दी गयी inspirational speech HINDI में share कर रहे हैं.ये वही भाषण है जिसने स्वामी जी की ख्याति पूरे विश्व में फैला दी थी और Parliament of Religions में हिंदुत्व और भारत का परचम लहरा दिया था.
Swami Vivekananda’s Address/Speech (HINDI) to the World Parliament of Religions, 11th September, 1893
अमेरिकी बहनों और भाइयोंआपके इस स्नेह्पूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय आपार हर्ष से भर गया है.मैं आपको दुनिया के सबसे पौराणिक भिक्षुओं कि तरफ से धन्यवाद् देता हूँ.; मैं आपको सभी धर्मों की जननी कि तरफ से धन्यवाद् देता हूँ , और मैं आपको सभी जाति-संप्रदाय के लाखों-करोड़ों हिन्दुओं कि तरफ से धन्यवाद् देता हूँ.मेरा धन्यवाद् उन वक्ताओं को भी जिन्होंने इस मंच से यह कहा है कि दुनिया में शहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देशों से फैला है . मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूँ जिसने दुनिया को शहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति (universal acceptance) का पाठ पढाया है.हम सिर्फ सार्वभौमिक शहनशीलता में ही विश्वास नहीं रखते बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं. मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूँ जिसने इस धरती के सभी देशों के सताए गए लोगों को शरण दी है.मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने अपने हृदय में उन इस्राइलियों के शुद्धतम स्मृतियाँ बचा कर रख्हीं हैं, जिनके मंदिरों को रोमनों ने तोड़-तोड़ कर खँडहर बना दिया, और तब उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली. मुझे इस बात का गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूँ जिसने महान पारसी देश के अवशेषों को शरण दी और अभी भी उन्हें बढ़ावा दे रहा है. भाइयों मैं आपको एक श्लोक कि कुछ पंक्तियाँ सुनाना चाहूँगा जिसे मैंने बचपन से स्मरण किया और दोहराया है, और जो रोज करोडो लोगो द्वारा हर दिन दोहराया जाता है.” जिस तरह से विभिन्न धाराओं कि उत्पत्ति विभिन्न स्रोतों से होती है उसी प्रकार मनुष्य अपनी इच्छा के अनुरूप अलग-अलग मार्ग चुनता है, वो देखने में भले सीधा या टेढ़े-मेढ़े लगे पर सभी भगवान तक ही जाते हैं. “
वर्तमान सम्मलेन , जो कि आज तक की सबसे पवित्र सभाओं में से है, स्वयं में गीता में बताये गए एक सिद्धांत का प्रमाण है , “जो भी मुझ तक आता है ; चाहे किसी भी रूप में , मैं उस तक पहुँचता हूँ , सभी मनुष्य विभिन्न मार्गों पे संघर्ष कर रहे हैं जिसका अंत मुझ में है .” सांप्रदायिकता, कट्टरता, और इसके भयानक वंशज, हठधर्मिता लम्बे समय से प्रथ्वी को अपने शिकंजों में जकड़े हुए हैं. इन्होने पृथ्वी को हिंसा से भर दिया है , कितनी बार ही ये धरती खून से लाल हुई है , कितनी ही सभ्यताओं का विनाश हुआ है और कितने देश नष्ट हुए हैं.
अगर ये भयानक राक्षस नहीं होते तो आज मानव समाज कहीं ज्यादा उन्नत होता. लेकिन अब उनका समय पूरा हो चूका है, मुझे पूरी उम्मीद है कि आज इस सम्मेलन का शंख नाद सभी हठधर्मिता,हर तरह के क्लेश ,चाहे वो तलवार से हों या कलम से, और हर एक मनुष्य, जो एक ही लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे हैं ; के बीच की दुर्भावनाओं का विनाश करेगा.
श्री गांधी आश्रम के कर्मचारियो की हड़ताल 11 दिन बाद समाप्त
11 दिन बाद खादी कर्मियों की हड़ताल खत्म
DAINIK JAGRAN 04 Dec 2012मालूम हो कि पांच सूत्रीय मांगों को लेकर खादी कर्मचारी हड़ताल पर चल रहे थे। रविवार को हड़ताली कर्मचारियों व खादी प्रबंधतंत्र के बीच समझौता वार्ता हुई। जिसमें कर्मचारियों की बिना शर्त के मांगों को मान लिया गया। मांगें मानने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल भारतीय श्री गांधी आश्रम श्रमिक संघ ने समाप्त कर दोनों जनपदों पीलीभीत व शाहजहांपुर के सभी खादी भंडार और उत्पत्ति केंद्र सोमवार को पूर्व की भांति खुल गए हैं। भारतीय श्री गांधी आश्रम श्रमिक संघ के अध्यक्ष डीएम विश्वकर्मा ने बताया कि हड़ताल खत्म हो गयी है। सभी दुकानों पर कर्मचारी काम पर लौट आए हैं। दुकानों में बिक्री होने लगी है। भारतीय मजदूर संघ के जिला संरक्षक अश्विनी कुमार आर्य ने हड़ताल में समर्थन देने वाले संगठनों के पदाधिकारियों का आभार जताया है।
श्री गांधी आश्रम के कर्मचारियो की हड़ताल 11 दिन बाद आज 02-12-2012 को समाप्त हो गई आखिरकार कर्मचारियो की एकजुटता के आगे प्रबंधन ने घुटने टेक दिए और श्री गाँधी आश्रम के कर्मचारियो की पांच सूत्रीय मांगे बिना शर्त मान ली गई , डी0यन 0विश्वकर्मा तथा उनके साथियो को समन्वय समिति की ओर से हार्दिक बधाई ,
अरुण प्रताप सिंह , महामंत्री
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