Monday, March 19, 2012

आखिर राजनीति के हुए शिकार रेल मत्री

    राजनीति के हुए शिकार रेल मत्री दिनेश त्रिवेदी , आखिर उनसे इस्तीफा ले ही लिया गया ममता की कठोरता का एक और उदाहरण मिला प्रधान मंत्री की मजबूरी साफ़ दिखाई  दे गई ,कुछ भी हो लेकिन सरकार चलती रहनी चाहिए, स्पष्ठ है की मंत्री जब तक अपनी पार्टी के मुखिया के इशारों पर चलेगा तभी तक बह मंत्रिमंडल मैं  रह सकेगा ! लोकतंत्र को कठपुतली तंत्र बनाने वाले लोगो को अब नकारना होगा ! यह एक बहुत गलत परंपरा पड़ी है ! जिसका सभी को मिलकर विरोध करना चाहिए ! मुझे अपनी एक रचना की पंक्तियाँ याद आ रही है -
  कुछ बोलो मत तुम मौन रहो , फिर चाहे जिसकी कौम रहो  !